“कश्मीर-समस्या”- समाधान की ओर एक कदम।

कश्मीर समस्या अब हमारे सामने उस विकराल रूप में नहीं रहा जिस रूप में वह 2014 तक था।
यह अब न अंतर-राष्ट्रीय मुद्दा रहा, न भारत-पाकितान के बीच का द्विपक्षीय मुद्दा। यह अब भारत का आंतरिक मामला मात्र रह गया हैं। विश्व समुदाय के लिये अब पीओके, गिलगिट, बलूचिस्तान व उसके साथ पाक-प्रायोजित आतंकवाद समस्या है। पाकिस्तान की स्थिति बहुत कमजोर हुई हैं। यहाँ तक उसे मुस्लिम राष्ट्रों से भी समर्थन नहीं मिल रहा हैं। चीन का अपना आर्थिक व सामरिक स्वार्थ है पाकिस्तान को समर्थन देने का। भारत-पाक के बीच अब केवल आतंकवाद एक मात्र मुद्दा है। यह पिछले 3 वर्षों में मोदी सरकार द्वारा किये गए अथक प्रयास के सफलता का प्रतिफल है। इसे हम शुद्ध रूप से कूटनीति सफलता कह सकते हैं मोदी सरकार की।
कश्मीर में मुख्य समस्या कानून व्यवस्था की व राजनीती रह गई हैं, जिसके आड़ में पाकिस्तान अपनी बेइज्जती की खीज निकालने के लिये आतंकवादियों को भेज कर हमें परेशान करता रहता हैं।
यह संभव हो पा रहा हैं संसद, न्यायपालिका, कार्यपालिका, मिडिया में बैठे “आस्तीन के साँपो” के द्वारा इनको दिए जा रहे खुले समर्थन के कारण।
खैर, इन सब का अंत तो सीधे तरीके से सरकार नहीं कर सकती हैं, “यह काम तो जनता को ही करना पड़ेगा”, लेकिन इनके द्वारा पोषित पत्थरबाज, अलगाववादी व आतंकवादियों का अंत सरकार के द्वारा किया जाना चाहिये। कुछ सुझाव आप सबके विचारार्थ:-
रामायण से हमने जाना है कि “दुश्मन पर विजय पाना हो तो स्थानिये समर्थन जरूरी हैं” और दूसरी बात “बिना भय के प्रित नहीं होती”।
स्थानिये लोग वहाँ के आतताइयों के खिलाफ किसी के साथ तब ही खड़े होते है, जब उन्हें उन आतताइयों से सुरक्षा का पूर्ण भरोसा दिया जाय। वर्ना स्थानिये लोग मजबूरी में उन आतताइयों के साथ खड़े रहेंगे भय के कारण। दूसरी बात दुश्मन तब कमजोर पड़ता हैं जब वह आप से भयभीत होता हैं।
अब कश्मीर के संदर्भ में देखे तो सेना, सुरक्षाबल व सरकार चाहे कुछ भी किये हो, खूब ईमानदारी से किये हो लेकिन वे अब तक सबसे जरूरी ये दोनों बातें नहीं कर पाये हैं –
1. स्थानिये लोगों को सुरक्षा देना और 2. आतंकियों में भय व्याप्त कराना। और इसी कारण अब तक कश्मीर की समस्या खत्म नहीं हो पाई हैं। आप यह मत कहिये कि आपने इतने आतंकी मार गिराये। वो मरने के लिए ही आते है और हर बार आपको बुरी तरह हरा कर मर जाते हैं। वो अपना उद्देश्य पूरी सफलता से हासिल कर लेते हैं, आप उसे मार कर बिना मतलब के खुस हो जाते हैं। वो जब चाहे, जहाँ चाहे घुस जाते हैं, स्कूल में आग लगा देते हैं, बैंक लूट लेते हैं, हथियार छीन लेते हैं, पोलिंग बूथ तक लूट लेते हैं, अपना वीडियो बनाते हैं, दुनिया को दिखाते है और आप केवल पेट्रोलिंग करते रह जाते हैं।
आप यह भी मत कहिये कि बाढ़ व प्राकृतिक विपदाओं के समय आपने उनकी मदद की। ये सही है, कश्मीरी आपका एहसान मानते हैं, वो आपकी मदद करना भी चाहते हैं, अनेको ने आपकी मदद करने की हिम्मत भी दिखाई, लेकिन उन्हें आप आतंकियों से बचा नहीं सके , वो आतताइयों के द्वारा मौत के घाट उतार दिए गए। फिर कौन हिम्मत दिखाये, किस भरोसे हिम्मत दिखाये आपकी मदद करने की? आप उन्हें सुरक्षा की गारंटी दीजिये, उन्हें उस सुरक्षा का एहसास कराइये, कश्मीर की 95% जनता आपके साथ होगी। फिर 5% अलगाववादियों को वो खुद मार देगी आपको कुछ करना ही नहीं पड़ेगा।
चलिये माना कि 70 वर्षो में सरकारे आपके साथ नहीं थी, आपको खुली छूट नहीं थी, लेकिन पिछले 3 वर्षों में ये शिकायत भी आपकी नहीं रही। फिर 3 वर्ष और हम उसी जगह खड़े है! क्यों? कभी सोचा है आपने? इसका मूल कारण है कि आप केवल प्रतिक्रियावादी बन कर कार्य कर रहे हैं। जब कोई घटना आपके खिलाफ होती हैं, तब आप प्रतिक्रिया स्वरूप कारवाही करते हैं। फिर अगली घटना का इंतजार करते हुए दैनिक कार्यो में व्यस्त हो जाते हैं। और यही सबसे बड़ी चूक हो जाती हैं, दुश्मन को तैयारी का मौका मिल जाता हैं। आपकी नीति होनी चाहिये “ढूढो और मारो”। उन्हें वीडियो मत बनाने दे, उन्हें चैन से न बैठने दे, उन्हें ऐसी सजा दे कि उनकी रूहे कॉप जाय, वे भारत की सीमा के अंदर आने से कतराए। आपको किसे बताना है क्यों बताना है कि कितने मारे और कैसे मारे? उसका वीडियो न बनाये, प्रमाण न छोड़े, लेकिन भारत-पाकिस्तान में बैठे उनके आकाओं में भी भय व्याप्त हो ऐसा कुछ करे। आप जानते हैं आपको क्या करना है, कैसे करना है? बहुत जंगल है कश्मीर में। लेकिन जो भी करे वो लगातार करे, टुकड़ो में नहीं, सतत् प्रयास से ही सफलता मिलती हैं।उनके अंदर आपका डर ऐसा हो कि वो जहन्नुम जाना पसंद करें लेकिन हिंदुस्तान की सीमा के अंदर आना नहीं।
इसके लिए आप इन बातों पर ध्यान दे सकते हैं:-
1. आतंक पीड़ित क्षेत्र में इंटरनेट व्यवस्था अनिश्चित काल के लिये पूरी तरह बंद कर दे। मैं इसकी मांग की थी ट्विटर पर, सुनने में आया है कि केवल 3G व 4G सेवा बंद हुई हैं। यह गलत हैं। पूर्ण बंदी हो।
2. “सेना बैरक में अच्छी नहीं लगती”। कश्मीर में संख्या बढ़ाये सेना व सुरक्षाबल की।
3. हर पुलिस चौकी में सेना के जवान भी तैनात रहे। हर सरकारी संसथान के सुरक्षा में पुलिस के साथ सेना-सुरक्षाबल तैनात रहे।
4. हर मोहल्ले व गली में पुलिस-सेना-सुरक्षाबल की चौकी हो।
5. हर देशभक्त नेता, पुलिस, कर्मचारी, स्थानिये लोगो को पर्याप्त सुरक्षा दीजिये। कमांडो सुरक्षा दीजिये। उनके अंदर के भय को मिटा कर उन्हें सुरक्षा का एहसास कराइये।
याद रहे “कश्मीरियों को विकास से अधिक सुरक्षा की जरूरत हैं”।
6. पेट्रोलिंग टीम बढाइये, हर टीम में अपनी संख्या बढाइये। जहाँ 2 की जरूरत है वहाँ 6 भेजिये।
7. ढूढो और मारो की नीति पर चलिये।
8. क्यों नहीं सरकार मरने के बाद 50 लाख देने के बदले वो न मर पाये इसका इंतजाम करे।
9. जो अलगाववादी नेता है, जिनका भारत के संविधान में भरोसा नहीं, जो कश्मीर को भारत का अंग नहीं मानते उनकी “नागरिकता ख़त्म करे”। उनकी व उनके परिवार की सुरक्षा व तमाम सरकारी सुविधा ख़त्म करे। उसे जेल में डाले। उसके सम्पति जब्त करें। आम जनता में उनके झूठ का भंडाफोड़ करें।
10. “आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता”। अतः आतंकी की मौत के बाद उसे सुवर के मांस के साथ जलाने की राष्ट्रीय नीति बनाये।
11. पैलेट गन के इस्तेमाल की पूरी छूट मिले सेना व सुरक्षाबल को।
12. उपद्रवियों को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार करें और उसे कश्मीर से बाहर के जेल में रखें। इसकी पूर्व घोषणा पुरे क्षेत्र में करा दे।
13. सरकार मिडिया के लोगो को बुला कर उनसे बात करें और इस मामले में उनका सहयोग लें। अलगावादियों, आतंकियों, उनके समर्थकों को मीडिया कवरेज से पूर्ण रूप से दूर रखें। उनके इंटरव्यू आदि न दिखाये। सेना व सुरक्षा बल के कारवाही को गुप्त रखें, उतनाही खबर दिखाये जितना सेना द्वारा बताया जाए। इसके बदले भारतीय मीडिया का सारा फोकस पीओके, बलूचिस्तान व गिलगिट पर होनी चाहिये। वहाँ की खबरें “डेली रिपोर्टिंग” का हिस्सा बने प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का। इसमें सरकार उनका सहयोग करें।
14. हर स्तर के इंटेलिजेंस को दुरुस्त करें।
मेरी एक बात याद रखिये कि “आधे मन से जंग नहीं जीती जाती”।
“दौड़ कछुआ ही जीतता है खरगोश नहीं”। सतत् प्रयास पूरी ताकत से कीजिये। सफलता बहुत जल्द मिलेगी।
यह भी सत्य है कि जैसे ही सरकार ये कारवाही करेगी आतंकियों के हिंदुस्तानी एजेंट दहाड़े मार कर रोने लगेंगे। लेकिन मोदी जी आपको वोट देशभक्त जनता ने दिया है, इन आतंकियों के रिस्तेदारो ने नहीं। ये संसद के अंदर चिल्लाये या बाहर आप इनकी परवाह मत कीजियेगा। देश की जनता इनका ईलाज कर देगी। आप तो सेना व सुरक्षा बल के साथ मिल कर पुरे मन से कश्मीर को आतंक व भय से मुक्त कर इसे फिर से “धरती का स्वर्ग”बनाइये। कल्हण की आत्मा आपको आवाज दे रही हैं। डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी जी का बलिदान व्यर्थ न जाने पाय।
वंदे मातरम। भारत माता की जय।
#saurabhyadavbjp

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