Dedicated to my mother…

ए मम्मी!

कभी कभी जब बचपन की पुरानी फोटू देखता हूँ न तो एक मुस्कान खुद ब खुद खिल उठती है। वो वाली फोटू जिसमें मैं दांत चिहारे आपके बगल बैठा हूँ और पापा फोटू खींच रहे हैं। वो फोटू भी जिसमें मैं पहली बार टाई बेल्ट लगा के स्कूल जाने को तैयार हूँ और आपका पल्लू पकड़ के खड़ा हूँ वो भी और वो पहले जन्मदिन वाली फोटू भी जिसमें मैं आपकी गोद में हूँ और लोग केक खिला खिला के मेरा नरक किये जा रहें हैं। हर एक फोटू एक दौर याद दिला देती है।

मुझे अभी भी याद है जब बचपन मैं पापा के साथ क्रिकेट बैट खरीदने जाता था तो आप पापा को सहेज देती थी के “सचिन वाला ही लेना” सचिन के लिए मेरी वो बौड़म दीवानगी को सिर्फ आपही ने समझा है। जब स्कूल जाते वक़्त मैं आपसे रोज़ 2 रुपये मांगता था और आप मना कर देती थी तो मैं यही सोचता था के कितनी कंजूस हो आप, पागल था मैं ये भूल ही जाता था के वो 4 रुपये वाला पारलेजी उस 2 रुपये से 2 रूपये महंगा था। आपसे रोज़ 1 रूपये लेकर ‘चाचा चौधरी’ कॉमिक्स किराये पे लाना और आपसे पढ़वा के ठहाके लगा के हँसना आज भी बहुत मिस करता हूँ। शहर से दूर जब पहली बार बाहर पढाई करने गया था तो हर रोज़ आपके बनाये खाने को मिस करता था.. हर रोज़.. और यही बोलता था के “यार थोड़ा और नमक होता तो बिलकुल मम्मी वाली सब्जी बनती!”

स्कूल में वो चोट्टी मैडम मेरी शिकायत करती तो आप खुद सब सुन लेती पर घर पे कभी मेरे गाल पे अपना गुस्सा नहीं उतारती थी।हालांकि मेरे नंबर कम आने पे बार बार उस शर्मा जी के लौण्डे वाला ओरहन आज तक सुन्ना पड़ता है मुझे पर अब तो सुनने की आदत भी पड़ गयी है।

मुझे स्कूल के लिए जूता-मोजा, टाई-बेल्ट और वो किनारे से मांग काढ़ के स्कूल भेजना और लौटते वक़्त वो ऑरेन्ज वाली आइसक्रीम खरीदना जिसे खा के पान खाने वाली फीलिंग आती है उसका स्वाद अभी तक जुबां पर है मेरे। आज भी जब देर तक सोता हूँ तो आप उसी टोन में चिल्लाकर बोलती हो के “10 बज रहा है और अभी तक सो रहे हो!!(भले ही घडी में 8 बज रहा हो!) ” महीनों बाद आज भी जब घर वापस आता हूँ तो स्पेशल भोजन(मिडिल क्लास शाकाहारी फैमिली में पनीर की सब्जी को स्पेशल बोलते हैं।) ही बना मिलता है।

बचपन में आपका वो तवे पे मेरे लिए छोटी छोटी रोटियां बनाना और दाल चावल सान के चम्मच लगा में खिलाना हमेशा अनमोल रहेगा। आज भी उन रोटियों में बचपन ढूंढता हूँ मैं! “आग लगे तुम्हारे फोन को” और “फोन में क्या देख देख मुस्किया रहे हो?” मेरे फोन को लेके बोलने वाला आपका फेवरेट डाइलॉग है। मुझे मालूम है आप बहुत इर्रिटेट होजाती हो मेरा ये फोन देख के।

लिखने को तो इतना कुछ है के हर एक लाइन पे दस कहानी याद आरही है।पर क्या करूँ कलम जाम सी हो गयी है। आपका “तारे जमीं पे” फ़िल्म का “मेरी माँ” वाला गाना सुन के रो देना और फिर फोन करके मेरा हाल पूछना मुझे भी रुला ही देता है। यार मम्मी कहने को तो बहुत कुछ है पर कह नही पा रहे। वैसे भी आप तो सब जानती हो न! और हाँ बहु ढूंढ ली है मैंने आपके लिए!;-) परेशान मत हो आप!

आपका नालायक लड़का…

 

#saurabhyadavbjp

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