Life ek Review…

ईंटो के चट्टे लगते ही रहने हैं..

बदरपुर में शंख सीपियाँ मिलती ही हैं..

शहर के बच्चों को ये सब नहीं पता..

मजदूरों के बच्चे जल्दी बड़े होते हैं..

 

डाइनिंग टेबल बस दहेज़ में लेने के लिए हैं..

उन पर बैठ कर कोई खाना नहीं खाता..

और वो बर्तन जो किसी ख़ास रिश्तेदार के आने का इंतज़ार करते रहे हैं..

आज भी पैकिंग में ही हैं..

 

चार झल्ले वाले पंखे न मेरे घर में हैं न मेरे किसी दोस्त के..

वो कौन लोग हैं जो सोते वक़्त नाईट सूट पहनते हैं..

 

नाइयों के दुकानो पर बैठ के बाल काले कराना एक अजीब मनहूसियत है..

और जब कलर से सने बालों के साथ घर तक आना होता है..

तो जिंदगी की बहुत सी गलतफहमियां दूर हो जाती हैं..

 

क्या अब भी लोग दुकान से जाके कांच वाली कोल्ड ड्रिंक खरीद के लाते हैं..

और २ घंटे बाद खाली बोतल वापस लौटाने जाते हैं..

 

हम उतने पैसे वाले नहीं हैं..

जितना हम सोचता आये थे..

हर महीने नए कपड़ो की जिद करते वक़्त ये अहसास नहीं था..

अब जब कमा रहे हैं..

तब पुरानी बातों को सोच के हम शीशे के सामने खड़े होके अपने आप को चांटे मारने चाहते हैं..

 

पर हम अपने आपको कुछ ज्यादा ही प्यार करते हैं..

शायद उतने तेज चांटे न मार पाएं जो मिल्खा मारता है..

 

कई सारे अधूरे सपने…अब नींद से जगा देते हैं..

ख़ास कर वो..जिन्हें हम पूरा कर सकते थे..

लेकिन हमने बेवजह का क्रिकेट खेला..

और ऐसी संगत चुनी…जिनके सपने बस गानो की लेटेस्ट CD खरीदना ही थे..

 

बचपन से पता था..

गया वक़्त वापस नहीं आता..

इसलिए जब भी ये सब बातें नींद से झकझोर देती हैं..

तो मुट्ठी भींच के दीवार पर मारने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचता..

 

Give me another chance I wanna grow up once again…भी फिल्मो में ही पॉसिबल है….

 

#saurabhyadavbjp

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s