Muslim ek dikhawa…

अभी कुछ दिन पहले मैं छुट्टी पर अपने घर गया हुआ था, शाम को मैं और पिताजी “ज़ी न्यूज़” पर सुधीर चौधरी वाला “DNA” देख रहे थे जिसमें बुरहान वानी और इस्लामिक आतंकवाद का मुद्दा चल रहा था।
अचानक पिताजी ने मुझसे पूछा ” मुसलमानों की क्या आइडियोलॉजी है कभी तुमने इस पर गौर किया है”

मैं थोड़ा संशय में पड़ गया आज पिताजी ने ये कौन सा अज़ीब प्रश्न कर दिया, मैं कुछ ज़वाब देता उससे पहले ही पिताजी ने मुझसे कहा तुम्हें एक कहानी सुनाता हूँ।

” एक गाँव में एक संपन्न परिवार रहता था, उनके पास खेती बाड़ी और पशुओं की कोई कमी नही थी, परिवार में दो बेटे थे जो शादीशुदा और संपन्न थे लेकिन एक बेटा बेईमान था वो हमेशा किसी न किसी बात पर अपने माता पिता और भाई से झगड़ा करता रहता था, उसकी रोज़ की कलह कलेश को देखकर मातापिता ने सारी संपत्ति दो भागों में बाँट दी, वो कलेशि लड़का अपनी सारी सम्पति लेकर दूसरे गाँव में वस गया।
लेकिन उस बेईमान लड़के के भी एक लड़का और लड़की थी जो विभाजन के समय ये कहकर की “वो दादा और दादी को छोड़कर कहीं नही जाएंगे वो दादा दादी को बहुत प्रेम करते हैं, वो हमेशा दादा दादी के साथ ही रहेंगें”
और वो दोनों दादा दादी के साथ रुक गये।
बूढे दादा दादी उन्हें बहुत प्यार करते थे, अब दादा दादी ने उन बच्चों का अच्छे स्कूल में दाखिला कराया, उन्हें अच्छी अच्छी व्यवस्था देने लगे। शुरुआती दिनों में उन बच्चों ने दादा दादी से कहा की वे कभी उन माता पिता के पास नही जाएँगे, दादा दादी में बच्चों को समझाया की तुम हर महीने अपने माता पिता से मिल सकते हो।
अब बच्चे हर महीने अपने माता पिता के पास जाते थे और दादा दादी के ख़र्चे से मौज उड़ाते थे। इस तरह उनका समय बीतता गया।

कुछ वर्षों बाद जब बच्चे बड़े हो गये, अब दादा दादी ने अपना हिस्सा बेचकर लड़के के लिए एक अच्छा व्यवसाय खुलवाया और लड़की के लिए एक अच्छा परिवार देखकर शादी कर दी, जिसमें दादा दादी ने अपनी सम्पति का चौथाई हिस्सा दहेज़ में दे दिया।

अब लड़के ने अपने व्यवसाय में घाटा दिखाकर उस व्यवसाय को बचाने के बहाने दादा दादी से और रुपये ऐंठा, फिर लड़की ने भी अपने पति के लिए व्यवसाय खुलवाने के लिए दादा दादी से एक अच्छी रक़म उधार ली, इस तरह ये मंझारा चलता रहा और दादा दादी हमेशा इस भृम में रहे की उनके नाती नातिनि उन्हें बहुत प्यार करते हैं।

लेकिन दादा दादी का दूसरा लड़का जो ये मंशा समझ रहा था ने उन बुड्ढों को समझाने की बहुत कोशिस की जिसके चलते परिवार में बहुत झगड़ा हुआ, फिर उन लड़के लड़की ने सारे गाँव में ये हल्ला मचा दिया की दादा दादी और उसके चाचा जी उन पर बहुत अत्याचार कर रहे हैं, फिर उन बच्चों ने गाँव में शोर कर दिया की इन दादा दादी के कहने पर वे अपने माता पिता के साथ नही गये और आज ये सभी हम पर अत्याचार कर रहें हैं, फिर उन बच्चों ने “पटवारी” को कुछ लालच देकर अपने पक्ष में खड़ा कर लिया और गाँव में घोषणा कर दी की वे दादा दादी की सम्पति के जायज़ हक़दार हैं और वे अपना हिस्सा लेकर दादा दादी से अलग होना चाहते हैं।
अब गाँव के कुछ लालची उनके पक्ष में खड़े हो गये और इस तरह उन बच्चों ने दादा दादी को कंगाल कर दिया और उन बूढे दादा दादी को सारे गाँव की नज़रों में अत्याचारी, बेईमान, धोखेबाज़ की पदवी दिला दी।
और फिर वो बच्चे अपने माँ बाप के साथ मिल गये।

अब दिनों बाद कहानी में ट्विस्ट आया जब दादा दादी को पता चला की “ये सारा खेल प्रीप्लान था, जिसे उनके ही उस कलेशि लड़के ने रचा था और जान बूझकर अपने बच्चों को वहाँ छोड़कर गया जिससे वो उनकी सारी सम्पति को हड़प सके”

अब मेरे पिताजी ने मुझसे कहा की “अशोक अब मुसलमानों की स्तिथि देखो, उन्होंने भारत जैसे सम्पन्न परिवार को जान बूझकर धर्म के आधार पर विभाजित करवाया और अपना हिस्सा लिया।
अब उन्होंने अपने प्लान के थ्रू कुछ मुसलमानों को भारत में ही रहने की हिदायत दी, अब उन मुसलमानों ने भी भारत के हिन्दुओँ को भरोषा दिया की वो भारत से बहुत प्यार करते हैं (ठीक वैसे ही जैसे वो बच्चे उन बूढ़े दादा दादी से करते थे)
और वो अपने मरते दम तक भारत में ही रहेंगें”

फिर कुछ सालों बाद उन मुसलमानों ने पाकिस्तान के अपने रिश्तेदारों ( माता पिता) से मिलना शुरू कर दिया, लेकिन मासूम भारत के हिन्दू यही समझते रहे की वो मुसलमान उन्हें बहुत प्यार करते हैं, इसलिये वो मुस्लिम भारत छोड़कर नही गये।
इस वात्सल्य में हिन्दुओँ ने अपनी जमीं पर उनके लिए मस्जिदें बनवायीं और उन्हें सिर आँखों पर रखा।
फिर उन मुसलमानों ने अपना रँग दिखाना शुरू किया और बेईमानी पर उतर आये और उन्होंने भारत के कई हिस्सों पर अपनी आबादी के आधार पर कब्ज़ा जमा लिया, जिसमें उस “पटवारी” जैसे वामपंथियों ने भारत में ये घोषणा कर दी की हिन्दू बहुत दमनकारी और अत्याचारी हैं, इन हिन्दुओँ ने मासूम मुसलमानों पर अत्याचार किया है और उनका हिस्सा नही दे रहे।

फिर पिताजी ने कहा की ” तुम्हें क्या लगता है, की उन दादा दादी ( हिन्दुओँ ) को आज वेवकूफ़ बनाया जा रहा है, एक्चुअल में उन दादा दादी (हिन्दुओँ )का वेवकूफ़ बनने का इतिहास बहुत पुराना है, पहले मुसलमानों ने हिन्दुओँ को तलवार के बल पर इस्लाम क़बूल कराया और जब इससे बात ना बनी तो उन्होंने हिन्दुओँ को वेवकूफ़ बनाने का एक और तरीका ईजाद कर लिया, वो था “सूफ़ी संत” जिसमें हिन्दुओँ को ढोंगी प्रेम के नाम पर इस्लाम और अल्लाह की महत्ता दिखाने लगे, उनके हर सूफ़ी गाने में सिर्फ़ इस्लाम के प्रतीकों जैसे ” अल्लाह, ख़ुदा, मौला, रसूल, सजदा जैसे शब्द ही आते थे जिसको उन मासूम दादा दादी जैसे हिन्दुओँ ने पुरजोर से अपनाया।

फिर पिताजी ने मुझसे कहा की ” भारत एक मात्र हिन्दू राष्ट्र है, लेकिन दुःख की बात है यहाँ हिन्दुओँ को आज भी मुसलमानों की मानसिकता समझ नही आयी, तुम्हें क्या लगता है अगर कश्मीर इन्हें दे दिया जाए तो समस्या ख़त्म हो जायेगी! बिल्कुल नही ख़त्म होगी, आज ये कश्मीर की माँग कर रहे हैं आने वाले कल को ये हैदराबाद माँगेगे फिर केरल फिर असम फिर पश्चिम बंगाल और इस तरह ये धीरे धीरे पुरे भारत पर कब्ज़ा करना चाहेँगे।

क्या तुम जानते हो मुसलमान हमेशा अपने प्री प्लान के थ्रू काम करते हैं, जब उन्हें किसी देश पर कब्ज़ा करना होता है तो वो हमेशा अपने आप को दो ग्रुप में डिवाइड कर लेते हैं जिसमें एक कट्टर होता है जो आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देता है और दूसरा तुमसे झूठें प्रेम का ढोंग दिखाता है जो तुम्हें हमेशा ये विश्वास दिलाता है की आतंकवादी इस्लामी नही होते, उन्हें धर्म के आधार पर नही देखना चाहिए और तुम मासूम हिन्दू उनकी बात मान लेते हो, ये रक़म खर्च करके हिन्दुओँ के कुछ ग़द्दारों जैसे वामपंथी और पत्रकारों को अपनी तरफ़ मिला लेते हैं फिर वो ग़द्दार देश में हर तरह ये माहौल बना देते हैं की मुसलमानों पर अत्याचार हो रहा है। और धीरे धीरे तुम सभी हिन्दू अपनी सम्पति जैसे कश्मीर, बंगाल, असम, केरल, यूपी, बिहार, जैसे कई राज्यों से उन दादा दादी की तरह बेदखल कर दिए जाते हो, लेकिन वो दूसरा शाँति और प्रेम का ढोँग दिखाने वाला समुदाय तुम्हें कभी महशुस ही नही होने देता की तुम्हारे घर से बेदख़ल किया जा रहा है और तुम आँख बन्द करके मान भी लेते हो”

और सुनों जब वो तुम्हारे राज्य या देश पर कब्ज़ा कर लेते हैं तो फिर वो दोनों ( आतंकवादी कट्टर और शाँति का ढोँग करने वाले) उस राज्य या देश को आपस में बराबर बाँट लेते हैं ठीक उस कलेशि बाप और उनके बच्चों की तरह”……

अब पिताजी ने अपनी बात पर विराम दिया और
मैं आज अपने पिताजी की बात सुनकर स्तब्ध रह गया, कितनी बडी बात उन्होंने कितने आसान शब्दों में समझा दी।

नोट :- पोस्ट को शेयर करें या कॉपी कट पेस्ट करके अपनी वाल पर लगायें , लेकिन इस तार्किक ज्ञान को ज़्यादा लोगों तक पहुँचाये।

धन्यवाद

#saurabhyadavbjp

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Ek mahabharat aisi bhi…

हे संजय…. मेरा मन बड़ा अशांत हो रहा है…सहसा ही मन में डर व्याप्त होता प्रतीत होता है…
मुझे बताओगे आखिर क्या चल रहा है मरुभूमि पर…

संजय: धृतराष्ट्र, मैं भारत से शुरू करता हूँ… सरकार वहां GST नामक बिल लेकर आई है जिससे कर देने में आसानी होगी… वहां के वित्त मंत्री , रक्षा मंत्री, कानून मंत्री सभी इस बिल को लेकर उत्साहित है…

धृतराष्ट्र : परन्तु ऊपर ये हलचल सी कैसे प्रतीत हो रही है…

संजय: धृतराष्ट्र ,आप अंधे हैं तो वही बनकर रहें , बिल्कुल भारत की न्यायपालिका की तरह..आप चाहते तो महाभारत रोकी जा सकती थी…अब इस तरह उत्तेजित न होइए…
आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि वे भारतीय मुसलमान हैं जो कश्मीर घाटी में बम फोड़ रहे हैं… दूसरे भारतीयों को मार रहे हैं…

धृतराष्ट्र: परन्तु संजय, वहां तो गुजरात प्रदेश के राजा मोदी का शासन है… फिर ये अन्याय कैसे..?

संजय: धृतराष्ट्र…उन्हें सेक्युलर कीड़े ने खाया है… वो गौहत्या रोकने वालों को दंड देने पर तुले हुए हैं…

धृतराष्ट्र : ये संजय, ये गौ खाने वाले कौन लोग हैं ,जरा विस्तार से बतलाओ, मुझे ऐसी बातें विष समान प्रतीत हो रही हैं…

संजय: धृतराष्ट्र ,ये वही लोग है जो टीवी पर नग्नता जाहिर करते हैं, साहित्यिक अवार्ड लौटाते है,किसी भी अन्याय के खिलाफ लामबंद होने की बजाय डीपी बदलते हैं, मोमबत्ती लेकर रास्ते को घेरते हैं, ग्रन्थों को पढ़ने की बजाय उनकी अवहेलना करते हैं, हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने के कुटिल उद्देश्य से वो किसी भी स्तर पर गिर सकते हैं….

धृतराष्ट्र: पर संजय, उन लोगों के साथ 5000 साल बहुत बुरा हुआ है… हस्तिनापुर के उजड़ जाने के बाद से ही पंडो ने मंदिरों पर कब्जा जमा लिया… दलितों को मंदिर में कदम ना रखने की हिदायत दी गयी…उनका सामाजिक बहिष्कार हुआ…पंडो ने मंदिर की कमाई खाई है… दलितों को उनका हक नही मिलेगा तो वो गाय ही खाएंगे ना…

संजय: हे धृतराष्ट्र, आप जानते हैं कि आपकी माता अम्बालिका ने व्यास जी के आगे अपनी आंखें बंद कर ली थीं… कारणवश आप अंधे हुए… इससे इतर आपके अंधा होने के पीछे आपपर शाप भी है…
चूंकि अगर दलितों को मंदिर में नही जाने दिया… किसी कर्मकांड में उन्होंने हिस्सा नही लिया तो किस बात के पैसे उन्हें वापिस किये जायें … सारे तो मंदिर जाने वाले सवर्णों ने भेंट किये होंगे…

धृतराष्ट्र: संजय, परन्तु मुसलमानों को आरक्षण तो देना ही चाहिए … शोषण तो उनका भी हुआ है…

संजय: धृतराष्ट्र ,आप पुत्रों के मोह में सच्चाई नही देख पा रहे हैं … मुसलमानों ने 800 साल राज किया है …ताजमहल, लाल किले जैसे राजशाही ठाठ थे उनके…उन्हें किसने शोषित कर दिया…

धृतराष्ट्र: तुम्हारी बातें मन मे व्यथा उतपन्न कर रही हैं मेरे…

संजय: किंचित भी शोक न मनाइए राजन…
आपके पुत्रों ने बंगाल फूंक दिया है…कश्मीर निगलने वाले हैं, सिंध, बलोच, पाक,केरल,कर्नाटक, पंजाब, अफगान, किष्किंधा, सूदूर प्रदेश सब जगह आपके पुत्रों का ही राज है महाराज…वादा किया था ना कि सुईं की नोक बराबर भी जमीन नही देंगे…

धृतराष्ट्र: पर कृष्ण रूपी मोदी और अर्जुन रूपी योगी का क्या किया जाए…

संजय: राजन… इन दोनों को हमने गौ रक्षकों के पीछे लगा दिया है…
अब राहुल रूपी दुर्योधन, दिग्विजय रूपी दुशाशन,शिखंडी रूपी केजरीवाल , भीष्म रूपी मनमोहन सिंह सभी मिलकर इनके मूल वोटरों का संहार कर सकते हैं…

धृतराष्ट्र: मन फिर से स्फूर्ति से भर गया संजय… अल्लाह हु अकबर

 

#saurabhyadavbjp

Fark Soch ka….

“चुस्त जींस पहनने से और मोबाईल रखने से लड़कियां बिगड़ रही है। अपनी मान-मर्यादा को भूल कर समाज को दूषित कर रही हैं। अतः पंचायत ने ये फैसला किया है कि लड़कियाँ अब न जींस पहनेंगी और न मोबाइल रखेंगी।”
– बल्दियापुर, राजस्थान

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तो अब आपको ये बता दूँ कि आखिर ये पंचायत क्यों बुलाई गयी थी?
ये पंचायत इसलिए बुलाई गयी थी कि शराब और गुटखा पर बैन लगे। सड़कों के किनारे जो जुआ खेला जाता है उस पर भी बैन लगे मगर अंत में फैसला ये लिया गया। आखिर लड़कियों के जींस के वजह से ही लड़के शराब पी रहे हैं, गुटखा खा रहे हैं और जुआ भी खेल रहें है।
मतलब हद है। सिर्फ राजस्थान ही नहीं देश के के कई और राज्यों का यही हाल है। लड़कियों के लिए तरह-तरह के कानून। वैसे भी हर भले-बुरे के लिए लड़कियां ही तो ज़िम्मेदार है ? रेप हो रहा इसके लिए लड़कियां ज़िम्मेवार, सड़क पर लड़कियों को छेड़ा जा रहा उसके लिए भी उसके ही कपडे ज़िम्मेवार। ऐसा लगता है कि इस देश से सारी लड़कियां कहीं और चली जाये तो देश की आधी समस्या तो यूँ ही समाप्त हो जाएगी नहीं ? न रहेगी बांस न बजेगी बांसुरी।
दुनिया कहाँ से कहाँ चली गयी, क्योकिं दुनिया गयी हैं हम अभी भी वही हैं, जहाँ आज से सालों पहले थे। गोबर में सिर दिए खड़े हैं।
मुझे यकीन है उस गाँव में न तो ढंग का स्कूल होगा, न स्वास्थ सुविधाएं होंगी और भी न जाने कितनी समस्याएं होंगी। मुद्दा तो मेरे ख्याल से पंचायत का वो होना चाहिए न। पंचो को तो गाँव के विकास के बारे में सोचना चाहिए मगर यहाँ तो वो चुस्त जीन्स और मोबाईल में उलझे बैठे हैं।

” ख़ैर गलती आपकी भी नहीं है। आप जहां से सोचते हैं, उस जगह की नसें तन जाती हैं लड़कियों को टाइट कपड़े में देख कर आखिर सोच कैसे पाइयेगा। ”

हाँ एक आखिरी बात अगर कोई भी लड़की जो राजस्थान या किसी भी ऐसी जगह से है, जहाँ इस तरह का तुग़लकी फ़रमान जारी किया गया है और वो ये पढ़ रही है, तो प्लीज इन चीज़ों के खिलाफ आवाज़ उठाओ। घर से निकलो और जींस में निकलो और सवाल करो। अपने हक़ के लिए लड़ो। तुम्हारे लिए कोई नहीं आने वाला। तुम्हें खुद अपना मसीहा बनना होगा!

#saurabhyadavceo

क्रोध के दो मिनट

एक युवक ने विवाह के दो साल बाद
परदेस जाकर व्यापार करने की
इच्छा पिता से कही ।
पिता ने स्वीकृति दी तो वह अपनी गर्भवती
पत्नी को माँ-बाप के जिम्मे छोड़कर व्यापार
करने चला गया ।
परदेश में मेहनत से बहुत धन कमाया और
वह धनी सेठ बन गया ।
सत्रह वर्ष धन कमाने में बीत गए तो सन्तुष्टि हुई
और वापस घर लौटने की इच्छा हुई ।
पत्नी को पत्र लिखकर आने की सूचना दी
और जहाज में बैठ गया ।
उसे जहाज में एक व्यक्ति मिला जो दुखी
मन से बैठा था ।
सेठ ने उसकी उदासी का कारण पूछा तो
उसने बताया कि
इस देश में ज्ञान की कोई कद्र नही है ।
मैं यहाँ ज्ञान के सूत्र बेचने आया था पर
कोई लेने को तैयार नहीं है ।
सेठ ने सोचा ‘इस देश में मैने बहुत धन कमाया है,
और यह मेरी कर्मभूमि है,
इसका मान रखना चाहिए !’
उसने ज्ञान के सूत्र खरीदने की इच्छा जताई ।
उस व्यक्ति ने कहा-
मेरे हर ज्ञान सूत्र की कीमत 500 स्वर्ण मुद्राएं है ।
सेठ को सौदा तो महंगा लग रहा था..
लेकिन कर्मभूमि का मान रखने के लिए
500 स्वर्ण मुद्राएं दे दी ।
व्यक्ति ने ज्ञान का पहला सूत्र दिया-
कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट
रूककर सोच लेना ।
सेठ ने सूत्र अपनी किताब में लिख लिया ।

कई दिनों की यात्रा के बाद रात्रि के समय
सेठ अपने नगर को पहुँचा ।
उसने सोचा इतने सालों बाद घर लौटा हूँ तो
क्यों न चुपके से बिना खबर दिए सीधे
पत्नी के पास पहुँच कर उसे आश्चर्य उपहार दूँ ।

घर के द्वारपालों को मौन रहने का इशारा
करके सीधे अपने पत्नी के कक्ष में गया
तो वहाँ का नजारा देखकर उसके पांवों के
नीचे की जमीन खिसक गई ।
पलंग पर उसकी पत्नी के पास एक
युवक सोया हुआ था ।

अत्यंत क्रोध में सोचने लगा कि
मैं परदेस में भी इसकी चिंता करता रहा और
ये यहां अन्य पुरुष के साथ है ।
दोनों को जिन्दा नही छोड़ूगाँ ।
क्रोध में तलवार निकाल ली ।

वार करने ही जा रहा था कि उतने में ही
उसे 500 स्वर्ण मुद्राओं से प्राप्त ज्ञान सूत्र
याद आया-
कि कोई भी कार्य करने से
पहले दो मिनट सोच लेना ।
सोचने के लिए रूका ।
तलवार पीछे खींची तो एक बर्तन से टकरा गई ।

बर्तन गिरा तो पत्नी की नींद खुल गई ।
जैसे ही उसकी नजर अपने पति पर पड़ी
वह ख़ुश हो गई और बोली-
आपके बिना जीवन सूना सूना था ।
इन्तजार में इतने वर्ष कैसे निकाले
यह मैं ही जानती हूँ ।

सेठ तो पलंग पर सोए पुरुष को
देखकर कुपित था ।
पत्नी ने युवक को उठाने के लिए कहा- बेटा जाग ।
तेरे पिता आए हैं ।
युवक उठकर जैसे ही पिता को प्रणाम
करने झुका माथे की पगड़ी गिर गई ।
उसके लम्बे बाल बिखर गए ।

सेठ की पत्नी ने कहा- स्वामी ये आपकी बेटी है ।
पिता के बिना इसके मान को कोई आंच न आए
इसलिए मैंने इसे बचपन से ही पुत्र के समान ही
पालन पोषण और संस्कार दिए हैं ।

यह सुनकर सेठ की आँखों से
अश्रुधारा बह निकली ।
पत्नी और बेटी को गले लगाकर
सोचने लगा कि यदि
आज मैने उस ज्ञानसूत्र को नहीं अपनाया होता
तो जल्दबाजी में कितना अनर्थ हो जाता ।
मेरे ही हाथों मेरा निर्दोष परिवार खत्म हो जाता ।

ज्ञान का यह सूत्र उस दिन तो मुझे महंगा
लग रहा था लेकिन ऐसे सूत्र के लिए तो
500 स्वर्ण मुद्राएं बहुत कम हैं ।
‘ज्ञान तो अनमोल है ‘

इस कहानी का सार यह है कि
जीवन के दो मिनट जो दुःखों से बचाकर
सुख की बरसात कर सकते हैं ।
वे हैं – *’क्रोध के दो मिनट’*

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प्रेरित कर सकता है ।
🌺🌺 🙏 🌺🌺

 

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GST- Goods & Service tax

*GST पर पीएम मोदी का पूरा भाषण*

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कुछ ऐसे पल होते हैं, जिसमें हम नई ऊंचाई को छूने का प्रयास करते हैं. आज मध्यरात्रि के समय हम लोग देश का भविष्य तय करने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि GST सिर्फ अर्थव्यवस्था के लिए नहीं है, कुछ देर बाद ही नई व्यवस्था की शुरुआत होगी.

पीएम ने कहा कि यह रास्ता किसी एक दल की सिद्धि नहीं है, ये रास्ता किसी एक सरकार की सिद्धि नहीं है ये जीएसटी सभी लोगों के प्रयास का फल है. उन्होंने कहा कि ये वो सेंट्रल हॉल है जहां पर कई ऐतिहासिक काम हुए हैं. पीएम ने कहा कि 9 दिसबंर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक यहां पर ही हुई थी. उस समय पंडित नेहरू, अबुल कलाम आजाद, वल्लभ भाई पटेल समेत कई लोग यहां पर बैठे थे.

पीएम ने कहा कि GST के रुप में हम एक नए भारत की शुरुआत कर रहे हैं, इसके लिए सेंट्रल हॉल से अच्छी जगह कोई नहीं है. मोदी बोले कि गीता में भी 18 अध्याय थे, और जीएसटी काउंसिल की भी 18 बैठके हुईं. पीएम ने कहा कि अब पूरे देश में एक ही टैक्स लगेगा, लगभग 500 टैक्स खत्म हो रहे हैं. अब से पहले दिल्ली में कुछ और दाम रहता था, तो नोएडा में कुछ और पर अब ऐसा नहीं होगा.

26 नवंबर 1949 देश ने संविधान को स्वीकार किया. यह वही जगह है. और आज जीएसटी के रूप से बढ़कर कोई और स्थान नहीं हो सकता, इस काम के लिए. संविधान का मंथन 2 साल 11 महीने 17 दिन चला था. हिंदुस्तान के कोने कोने से विद्वान उस बहस में हिस्सा लेते थे. वाद-विवाद होते थे, राजी नाराजी होती थी.

पीएम ने कहा कि सब मिलकर बहस करते थे रास्ते खोजते थे. इस पार उस पार नहीं हो पाए तो बीच का रास्ता खोजकर चलने का प्रयास करते थे.जीएसटी टीम इंडिया का क्या परिणाम हो सकता है, यह उसके सामर्थ का परिचायक है. जीएसटी काउंसिल केंद्र और राज्य ने मिलकर, जिसने गरीबों के लिए पहले उपलब्ध सेवाओं को बरकरार रखा है. दल कोई भी हो, सरकार कोई भी गरीबों के प्रति संवेदनशीलता सबने रखी है.

पीएम मोदी ने कहा कि जीएसटी लागू होने से ईमानदार लोगों को कोई नुकसान नहीं होगा, उन्होंने कहा कि GST से कालाधन, भ्रष्टाचार खत्म होगा. ये व्यवस्था देश के गरीबों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद होगी |

*GST पर वित्त मंत्री अरुण जेटली का भाषण*

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जीएसटी लागू होने से नई यात्रा की शुरुआत हो रही है. इस यात्रा में कई लोगों का सहयोग रहा है. हमारा लक्ष्य एक देश, एक टैक्स का है. इस सिस्टम को पास करने में केंद्र और राज्य सरकार का सहयोग रहा है, राष्ट्र के हित में पूरा देश एक साथ आया है. सभी राज्यों ने एक साथ आकर देश के संघीय ढांचे का उदाहरण है.

उन्होंने कहा कि आज से हमारा लक्ष्य सभी को साथ चलने का है. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी इस यात्रा के अहम गवाह हैं, NDA 1 ने 2003 में ऐतिहासिक रिपोर्ट दी थी, जिसके बाद 2006 के बजट में यूपीए सरकार ने घोषणा की थी कि 2010 में इसे लागू किया जाएगा. उस दौरान वित्तमंत्री ने इसे सबके सामने रखा था, और संविधान में संशोधन हुआ था.

जेटली ने कहा कि स्टैंडिंग कमेटी के ही निर्णय का असर था कि केंद्र और राज्य एक साथ आ पाए. जिससे जीएसटी काउंसिल में सभी को मदद मिली. जेटली ने कहा कि GST के तहत सभी को लाना चाहता हैं. सभी की कोशिश रही कि हर पार्टी का इसमें योगदान हो. प्रो. दासगुप्ता, सुशील मोदी, के.एन. मणि, डॉ. अमित मित्रा ने राज्यों में आम राय बनाने में अच्छी कोशिश की. यह प्रक्रिया 15 साल पहले ही शुरू हुई थी.

अरुण जेटली बोले कि संसद ने सभी सुझावों को सर्वसम्मति से पास किया, जीएसटी काउंसिल ने 18 बार बैठक की थी. जिसमें हर निर्णय सर्वसम्मति से हुआ है, कभी भी वोट डलवाने की जरुरत नहीं पड़ी. अभी तक 24 निर्णय हुए हैं, 1211 सामानों पर टैक्स तय हुआ है. हमारा लक्ष्य था कि आम आदमी पर ज्यादा बोझ ना पड़े और राज्य-केंद्र सरकार के राजस्व पर भी कोई प्रभाव ना पड़े. उन्होंने कहा कि आज के समय में 17 टैक्स और 23 सेस को समाप्त कर अब सिर्फ एक टैक्स जीएसटी लागू कर दिया गया है. अब सिर्फ एक ही रिटर्न दायर करना होगा. इस निर्णय को लागू करने में सभी का योगदान है, मैं सभी का धन्यवाद करता हूं. जीएसटी लागू होने से महंगाई कम होगी, टैक्स का झंझट कम होगा |

*GST* *1जुलाई से लागू*

0% GST Rates Items –*
गेहूं, चावल, दूसरे अनाज, आटा, मैदा, बेसन, चूड़ा, मूड़ी (मुरमुरे), खोई, ब्रेड, गुड़, दूध, दही, लस्सी, खुला पनीर, अंडे, मीट-मछली, शहद, ताजी फल-सब्जियां, प्रसाद, नमक, सेंधा/काला नमक, कुमकुम, बिंदी, सिंदूर, चूड़ियां, पान के पत्ते, गर्भनिरोधक, स्टांप पेपर, कोर्ट के कागजात, डाक विभाग के पोस्टकार्ड/लिफाफे, किताबें, स्लेट-पेंसिल, चॉक, समाचार पत्र-पत्रिकाएं, मैप, एटलस, ग्लोब, हैंडलूम, मिट्टी के बर्तन, खेती में इस्तेमाल होने वाले औजार, बीज, बिना ब्रांड के ऑर्गेनिक खाद, सभी तरह के गर्भनिरोधक, ब्लड, सुनने की मशीन।

*5% GST Rates Items –*
ब्रांडेड अनाज, ब्रांडेड आटा, ब्रांडेड शहद, चीनी, चाय, कॉफी, मिठाइयां, *खाद्य तेल,* स्किम्ड मिल्क पाउडर, बच्चों के मिल्क फूड, रस्क, पिज्जा ब्रेड, टोस्ट ब्रेड, पेस्ट्री मिक्स, प्रोसेस्ड/फ्रोजन फल-सब्जियां, पैकिंग वाला पनीर, ड्राई फिश, न्यूजप्रिंट, ब्रोशर, लीफलेट, राशन का केरोसिन, रसोई गैस, झाडू, क्रीम, *मसाले,* जूस, साबूदाना, जड़ी-बूटी, लौंग, दालचीनी, जायफल, जीवन रक्षक दवाएं, स्टेंट, ब्लड वैक्सीन, हेपेटाइटिस डायग्नोसिस किट, ड्रग फॉर्मूलेशन, क्रच, व्हीलचेयर, ट्रायसाइकिल, लाइफबोट, हैंडपंप और उसके पार्ट्स, सोलर वाटर हीटर, रिन्यूएबल एनर्जी डिवाइस, ईंट, मिट्टी के टाइल्स, साइकिल-रिक्शा के टायर, कोयला, लिग्नाइट, कोक, कोल गैस, सभी ओर (अयस्क) और कंसेंट्रेट, राशन का केरोसिन, रसोई गैस।

*12% GST Rates Items –*
नमकीन, भुजिया, *बटर ऑयल, घी*, मोबाइल फोन, ड्राई फ्रूट, फ्रूट और वेजिटेबल जूस, सोया मिल्क जूस और दूध युक्त ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड/फ्रोजन मीट-मछली, अगरबत्ती, कैंडल, आयुर्वेदिक-यूनानी-सिद्धा-होम्यो दवाएं, गॉज, बैंडेज, प्लास्टर, ऑर्थोपेडिक उपकरण, टूथ पाउडर, सिलाई मशीन और इसकी सुई, बायो गैस, एक्सरसाइज बुक, क्राफ्ट पेपर, पेपर बॉक्स, बच्चों की ड्रॉइंग और कलर बुक, प्रिंटेड कार्ड, चश्मे का लेंस, पेंसिल शार्पनर, छुरी, कॉयर मैट्रेस, एलईडी लाइट, किचन और टॉयलेट के सेरेमिक आइटम, स्टील, तांबे और एल्यूमीनियम के बर्तन, इलेक्ट्रिक वाहन, साइकिल और पार्ट्स, खेल के सामान, खिलौने वाली साइकिल, कार और स्कूटर, आर्ट वर्क, मार्बल/ग्रेनाइट ब्लॉक, छाता, वाकिंग स्टिक, फ्लाईएश की ईंटें, कंघी, पेंसिल, क्रेयॉन।

*18% GST Rates Items –*
हेयर ऑयल, साबुन, टूथपेस्ट, कॉर्न फ्लेक्स, पेस्ट्री, केक, जैम-जेली, आइसक्रीम, इंस्टैंट फूड, शुगर कन्फेक्शनरी, फूड मिक्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स कंसेंट्रेट, डायबेटिक फूड, निकोटिन गम, मिनरल वॉटर, हेयर ऑयल, साबुन, टूथपेस्ट, कॉयर मैट्रेस, कॉटन पिलो, रजिस्टर, अकाउंट बुक, नोटबुक, इरेजर, फाउंटेन पेन, नैपकिन, टिश्यू पेपर, टॉयलेट पेपर, कैमरा, स्पीकर, प्लास्टिक प्रोडक्ट, हेलमेट, कैन, पाइप, शीट, कीटनाशक, रिफ्रैक्टरी सीमेंट, बायोडीजल, प्लास्टिक के ट्यूब, पाइप और घरेलू सामान, सेरेमिक-पोर्सिलेन-चाइना से बनी घरेलू चीजें, कांच की बोतल-जार-बर्तन, स्टील के ट-बार-एंगल-ट्यूब-पाइप-नट-बोल्ट, एलपीजी स्टोव, इलेक्ट्रिक मोटर और जेनरेटर, ऑप्टिकल फाइबर, चश्मे का फ्रेम, गॉगल्स, विकलांगों की कार।

*28% GST Rates Items –*
कस्टर्ड पाउडर, इंस्टैंट कॉफी, चॉकलेट, परफ्यूम, शैंपू, ब्यूटी या मेकअप के सामान, डियोड्रेंट, हेयर डाइ/क्रीम, पाउडर, स्किन केयर प्रोडक्ट, सनस्क्रीन लोशन, मैनिक्योर/पैडीक्योर प्रोडक्ट, शेविंग क्रीम, रेजर, आफ्टरशेव, लिक्विड सोप, डिटरजेंट, एल्युमीनियम फ्वायल, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, डिश वाशर, इलेक्ट्रिक हीटर, इलेक्ट्रिक हॉट प्लेट, प्रिंटर, फोटो कॉपी और फैक्स मशीन, लेदर प्रोडक्ट, विग, घड़ियां, वीडियो गेम कंसोल, सीमेंट, पेंट-वार्निश, पुट्टी, प्लाई बोर्ड, मार्बल/ग्रेनाइट (ब्लॉक नहीं), प्लास्टर, माइका, स्टील पाइप, टाइल्स और सेरामिक्स प्रोडक्ट, प्लास्टिक की फ्लोर कवरिंग और बाथ फिटिंग्स, कार-बस-ट्रक के ट्यूब-टायर, लैंप, लाइट फिटिंग्स, एल्युमिनियम के डोर-विंडो फ्रेम, इनसुलेटेड वायर-केबल।

*GST के Rules*

CGST= Central Goods and Service tax
SGST= State Goods and Service tax
IGST= Import Goods and Service tax

*अ*- 20 लाख ₹ तक के टर्नओवर वालों को GST भरने की आवश्यकता नहीं है वे आराम से अपना व्यवसाय बिना किसी चिंता के कर सकते हैं।

*ब*- यह कि जिनका टर्नओवर 75 लाख ₹ तक है । उन्हें केवल 1% GST भरना है ।
ना तो उन्हें महीने के चार रिटर्न भरना है और ना ही साल के 37 रिटर्न भरना है। उन्हें केवल तिमाही एवं सालाना रिटर्न ही भरना होगा। लेकिन इसके लिए आपको कंपोजीशन स्कीम लेना होगी।

*स*- देश के लगभग 65 से 68% व्यापारी इन दो बिंदुओं के अंतर्गत ही आते हैं यदि GST को ठीक प्रकार से समझा जाए तो छोटे और मझोले व्यापारियों के लिए इससे बढ़िया और कुछ हो ही नहीं सकता।

GST में इन चीजों से आजादी मिलेगी ..

1- *16 तरह के टैक्स से आजादी :*
केंद्र के एक्साइज,
सर्विस टैक्स,
एसएडी,
सीवीडी व राज्यों के वैट,
सीएसटी,
एंट्री और लग्झरी समेत 16 तरह के टैक्स खत्म होंगे।

2 – *1150 तरह की चुंगी से आजादी :*
देश के सभी राज्यों में अभी कुल मिलाकर 1 हजार 150 तरह की चुंगिया है, ये सब खत्म होंगी और पूरा देश एक बाजार बन जाएगा।

3 – *टैक्स पर टैक्स से आजादी :*
अभी उत्पाद की लागत के साथ-साथ केंद्र के टैक्स पर भी राज्य का टैक्स लगता है, जीएसटी में टैक्स पर टैक्स नहीं लगेगा।

4 – *टैक्स ऑफिस जाने से आजादी :*
सेल्स रिटर्न से लेकर क्रेडिट,
रिफंड क्लेम तक सब कुछ अब ऑनलाइन होगा। रिफंड भी अब ऑनलाइन ही आएगा। तो अब से टैक्स ऑफिस का चक्कर भी खत्म।

5 – *अलग-अलग कीमतों से आजादी :*
राज्यों के वैट,
एंट्री टैक्स अलग-अलग होने से किसी भी उत्पाद की कीमत हर राज्य में अलग-अलग होती है, जीएसटी में सभी उत्पाद की एक ही कीमत होगी । चाहे वो किसी भी राज्य में मिले।

अतः सभी व्यापारी भाइयों से निवेदन है कि बिना सोचे समझे जीएसटी के बारे में अफवाहें सुनकर परेशान होना बंद करें और तो और कई लोगो द्वारा यह भी अफवाह फैलाई जा रही है कि GST में सीधे गिरफ़्तारी के प्रावधान है लेकिन यह केवल कमिश्नर रैंक वाले अफसर को ही है और वह भी केवल उन्हीं को जिनका की टर्नओवर 100 करोड़ ₹ या उससे अधिक है और ऐसे केवल कुछ ही व्यापारी पूरे देश में है ।

अतः छोटे व्यापारियों के लिए तो GST एक वरदान सामान है । आवश्यकता है तो बस इसे समझने की ।

 

*ICAI के स्थापना दिवस के कार्यक्रम में पीएम ने कहा:-*

*GST पर दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम से पीएम ने किया सम्बोधन*

30 तारीख के 48 घण्टे पहले देश की 1 लाख फर्जी कंपनियों को बंद किया गया

नोटबंदी के बाद देश की 3 लाख कंपनिया संदेह के दायरे में,कानून तोड़ने वाली कम्पनियो के खिलाफ कड़ी कार्यवाही होगी-

जिन्होंने गरीबो को लूटा उन्हें गरीबों को वापस करना होगा, स्विस बैंक में भारतीय जमा पैसे में 2013 के बाद 42 % की भारी गिरावट आई-

कुछ लोग प्रगति रोकने का काम करते है, कुछ लोगों की चोरी से देश का विकास रुकता है-

देश के मात्र 32 लाख लोग ही अपनी आय 10 लाख से ज्यादा बताते है जबकि हर साल करोडो लोग लग्जरी गाड़ियाँ खरीदते हैं-

CA ठान ले तो कोई टैक्स चोरी की हिम्मत नही कर सकता, चोर चोरी तभी करता है जब उसे मालूम होता है कि उसे कोई बचाने वाला है-

*किसी न किसी को देश के लिए जीना होगा- पीएम*💥

धन्यवाद ।

एक देश
एक कर = GST

#saurabhyadavbjp

 

GST at a Glance…

एक राजा ने बहुत ही सुंदर ”महल” बनावाया

और महल के मुख्य द्वार पर एक ”गणित का सूत्र” लिखवाया

और एक घोषणा की कि इस सूत्र से यह ‘द्वार खुल जाएगा

और जो भी इस ”सूत्र” को ”हल” कर के ”द्वार” खोलेगा में उसे अपना उत्तराधीकारी घोषित कर दूंगा।

राज्य के बड़े बड़े गणितज्ञ आये और सूत्र देखकर लोट गए,

किसी को कुछ समझ नहीं आया। आख़री दिन आ चुका था

उस दिन 3 लोग आये और कहने लगे हम इस सूत्र को हल कर देंगे। उसमे 2 तो दूसरे राज्य के बड़े गणितज्ञ अपने साथ बहुत से पुराने गणित के सूत्रो की पुस्तकों सहित आये।

लेकिन एक व्यक्ति जो ”साधक” की तरह नजर आ रहा था

सीधा साधा कुछ भी साथ नहीं लाया था। उसने कहा मै यहां बैठा हूँ पहले इन्हें मौक़ा दिया जाए।

दोनों गहराई से सूत्र हल करने में लग गए लेकिन द्वार नहीं खोल पाये और अपनी हार मान ली।

अंत में उस साधक को बुलाया गया और कहा कि आप सूत्र हल करिये समय शुरू हो चुका है।

साधक ने आँख खोली और सहज मुस्कान के साथ ‘द्वार’ की ओर गया। साधक ने धीरे से द्वार को धकेला और यह क्या?

द्वार खुल गया, राजा ने साधक से पूछा – आप ने ऐसा क्या किया?

साधक ने बताया जब में ‘ध्यान’ में बैठा तो सबसे पहले अंतर्मन से आवाज आई, कि पहले ये जाँच तो कर ले कि सूत्र है भी या नहीं।

इसके बाद इसे हल ”करने की सोचना” और मैंने वही किया!

कई बार जिंदगी में कोई ”समस्या” होती ही नहीं और हम ”विचारो” में उसे बड़ा बना लेते हैं।

*जीएसटी लगने तो दीजिये अभी अपना ब्लड प्रेशर मत बढाइये*

#saurabhyadavbjp

Dharm Ek chhlawa…

एक आम आदमी सुबह जागने के बाद सबसे पहले टॉयलेट जाता है,
बाहर आ कर साबुन से हाथ धोता है,

दाँत ब्रश करता है,

नहाता है,

कपड़े पहनकर तैयार होता है, अखबार पढता है,

नाश्ता करता है,

घर से काम के लिए निकल जाता है,

बाहर निकल कर रिक्शा करता है, फिर लोकल बस या ट्रेन में या अपनी सवारी से ऑफिस पहुँचता है,

वहाँ पूरा दिन काम करता है, साथियों के साथ चाय पीता है,
शाम को वापिस घर के लिए निकलता है,

घर के रास्ते में

बच्चों के लिए टॉफी, बीवी के लिए मिठाई वगैरह लेता है,

मोबाइल में रिचार्ज करवाता है, और अनेक छोटे मोटे काम निपटाते हुए घर पहुँचता है,

अब आप बताइये कि उसे दिन भर में कहीं कोई “हिन्दू” या “मुसलमान” मिला ?

क्या उसने दिन भर में किसी “हिन्दू” या “मुसलमान” पर कोई अत्याचार किया ?

उसको जो दिन भर में मिले वो थे.. अख़बार वाले भैया,

दूध वाले भैया,

रिक्शा वाले भैया,

बस कंडक्टर,

ऑफिस के मित्र,

आंगतुक,

पान वाले भैया,

चाय वाले भैया,

टॉफी की दुकान वाले भैया,

मिठाई की दूकान वाले भैया..

जब ये सब लोग भैया और मित्र हैं तो इनमें “हिन्दू” या “मुसलमान” कहाँ है ?

“क्या दिन भर में उसने किसी से पूछा कि भाई, तू “हिन्दू” है या “मुसलमान” ?

अगर तू “हिन्दू” या “मुसलमान” है तो मैं तेरी बस में सफ़र नहीं करूँगा,

तेरे हाथ की चाय नहीं पियूँगा,

तेरी दुकान से टॉफी नहीं खरीदूंगा,

क्या उसने साबुन, दूध, आटा, नमक, कपड़े, जूते, अखबार, टॉफी, मिठाई खरीदते समय किसी से ये सवाल किया था कि ये सब बनाने और उगाने वाले “हिन्दू” हैं या “मुसलमान” ?

“जब हमारी रोजमर्रा की ज़िन्दगी में मिलने वाले लोग “हिन्दू” या “मुसलमान” नहीं होते तो फिर क्या वजह है कि “चुनाव” आते ही हम “हिन्दू” या “मुसलमान” हो जाते हैं ?

समाज के तीन जहर

टीवी की बेमतलब की बहस

राजनेताओ के जहरीले बोल

और कुछ कम्बख्त लोगो के सोशल मीडिया के भड़काऊ मैसेज

इनसे दूर रहे तो शायद बहुत हद तक समस्या तो हल हो ही जायेगी.

पसंद आये तो share करे🙏🙏🙏

 

#saurabhyadavbjp

Dr Kalam A Untold story…

DD Podhigai telecast an interview with Mr P M Nair, retired IAS officer, who was the Secretary to Dr Kalam Sir when he was the President. I summarise the points he spoke in a voice choked with emotion. Mr Nair authored a book titled *”Kalam Effect”*

1. Dr Kalam used to receive costly gifts whenever he went abroad as it is customary for many nations to give gifts to the visiting Heads of State. Refusing the gift would become an insult to the nation and an embarrassment for India. So, he received them and on his return, Dr Kalam asked the gifts to be photographed and then catalogued and handed over to the archives. Afterwards, he never even looked at them. He did not take even a pencil from the gifts received when he left Rashtrapathi Bhavan.

2.  In 2002, the year Dr Kalam took over, the Ramadan month came in July-August. it was a regular practice for the President to host an iftar party. Dr Kalam asked Mr Nair why he should host a party to people who are already well fed and asked him to find out how much would be the cost. Mr Nair told it would cost around Rs. 22 lakhs. Dr Kalam asked him to donate that amount to a few selected orphanages in the form of food, dresses and blankets. The selection of orphanages was left to a team in Rashtrapathi Bhavan and Dr Kalam had no role in it. After the selection was made, Dr Kalam asked Mr Nair to come inside his room and gave him a cheque for Rs 1 lakh. He said that he was giving some amount from his personal savings and this should not be informed to anyone. Mr Nair was so shocked that he said “Sir, I will go outside and tell everyone . People should know that here is a man who not only donated what he should have spent but he is giving his own money also”. Dr Kalam though he was a devout Muslim did not have Iftar parties in the years in which he was the President.

3. Dr Kalam did not like “Yes Sir” type of people. Once when the Chief Justice of India had come and on some point Dr Kalam expressed his view and asked Mr Nair, “Do you agree?” Mr Nair said “No Sir, I do not agree with you”.

The Chief Justice was shocked and could not believe his ears. It was impossible for a civil servant to disagree with the President and that too so openly. Mr Nair told him that the President would question him afterwards why he disagreed and if the reason was logical 99% he would change his mind.

4. Dr Kalam invited 50 of his relatives to come to Delhi and they all stayed in Rashtrapathi Bhavan. He organised a bus for them to go around the city which was paid for by him. No official car was used. All their stay and food was calculated as per the instructions of Dr Kalam and the bill came to Rs 2 lakhs which he paid. In the history of this country no one has done it.

Now, wait for the climax, Dr Kalam’s elder brother stayed with him in his room for the entire one week as Dr Kalam wanted his brother to stay with him. When they left, Dr Kalam wanted to pay rent for that room also. Imagine the President of a country paying rent for the room in which he is staying. This was any way not agreed to by the staff who thought the honesty was getting too much to handle!!!.

5.  When Kalam Sir was to leave Rashtrapathi Bhavan at the end of his tenure, every staff member went and met him and paid their respects. Mr Nair went to him alone as his wife had fractured her leg and was confined to bed. Dr Kalam asked why his wife did not come. He replied that she was in bed due to an accident. Next day, Mr.Nair saw lot of policemen around his house and asked what had happened. They said that the President of India was coming to visit him in his house. He came and met his wife and chatted for some time. Mr Nair says that no president of any country would visit a civil servant’s house and that too on such a simple pretext.

I thought I should give the details as many of you may not have seen the telecast and so it may be useful.

The younger brother of AJP Abdul Kalam runs an umbrella repairing shop. When Mr. Nair met him during Kalam’s funeral,  he touched his feet, in token of respect for both Mr. Nair and Brother.

Such information should be widely shared on social media as mainstream media will not show this because it doesn’t carry the so-called TRP value.

Salute to this greatest President of India.

#saurabhyadavbjp

Caste-System A Mystery…

It is unfortunate that in this country of ours, where Vedas were the foundation of our culture, we forgot these original lessons of Vedas and got trapped in a variety of misconceptions regarding birth-based caste system and discrimination of people born in certain castes collectively known as Shudra.

The misleading theories of communists and biased indologists have already caused a great damage to our society and have sown seeds of differences. It is unfortunate that so-called Dalits consider themselves outcaste and hence we fail to unite together for prosperity and security. The only solution is to go back to the roots – the Vedas – and rebuild our understanding of our relationships with each other.

Now, we shall evaluate the reality of caste system in Vedas and actual meaning of Shudra.

1. “Vedas and Shudra”, there is absolutely no element of hatred or discrimination in Vedas regarding any person – be he or she a Brahmin, Vaishya, Kshatriya or Shudra.

2.The concept of caste is relatively new. Vedas contain no word that can be considered a synonym for ‘caste’. The two words commonly considered to mean ‘caste’ are Jaati and Varna. However the truth is that, all the three mean completely different things.
Caste is a European innovation having no semblance in Vedic culture.

Jaati:-

Jaati means a classification based on source of origin. Nyaya Sutra states “Samaanaprasavaatmika Jaatih” or those having similar birth source form a Jaati.
An initial broad classification made by Rishis is 4-fold: Udbhija (coming out of ground like plants), Andaja (coming out of eggs like birds and reptiles), Pindaja (mammals) and Ushmaj (reproducing due to temperature and ambient conditions like virus, bacteria etc).
Similarly, various animals like elephant, lion, rabbits etc form different ‘Jaati’. In same manner, entire humanity forms one ‘Jaati’. A particular Jaati will have similar physical characteristics, cannot change from one Jaati to another and cannot cross-breed. Thus Jaati is creation of Ishwar or God.
Brahmin, Kshatriya, Vaishya and Shudra are no way different Jaati because there is no difference in source of birth or even physical characteristics to differentiate between them.
Later, word ‘Jaati’ started being used to imply any kind of classification. Thus in common usage, we call even different communities as different ‘Jaati’. However that is merely convenience of usage. In reality, all humans form one single Jaati.

Varna:-

The actual word used for Brahmin, Kshatriya, Vaishya and Shudra is ‘Varna’ and not Jaati.
The word ‘Varna’ is used not only for these four, but also for Dasyu and Arya.
‘Varna’ means one that is adopted by choice. Thus, while Jaati is provided by God, ‘Varna’ is our own choice.
Those who choose to be Arya are called ‘Arya Varna’. Those who choose to be Dasyu become ‘Dasyu Varna’. Same for Brahmin, Kshatriya, Vaishya and Shudra.
That is why Vedic Dharma is called ‘Varnashram Dharma’. The word Varna itself implies that this is based on complete freedom of choice and meritocracy.

3.Those involved in intellectual activities have chosen ‘Brahmin Varna’. Those into defense and warfare are ‘Kshatriya Varna’. Those in economics and animal rearing are ‘Vaishya Varna’ and those involved in other support functions are “Shudra Varna”. They refer merely to various choices of professions and have nothing to do with any Jaati or birth.

4.Often mantras of Purush Sukta are cited to prove that Brahmins originated from Mouth, Kshatriya from hands, Vaishya from thighs and Shudras from legs of God. Thus these varnas are birth-based. However nothing could be more deceptive. Let us see why:

a. Vedas describe God to be shapeless and unchangeable. How can such a God take shape of a gigantic person if He is shapeless. Refer Yajurved 40.8.

b. If indeed this were true, this would defy the theory of Karma of Vedas. Because as per Theory of Karma, one’s family of birth can change as per his or her deeds. So one born in Shudra family can take birth as king’s son in next birth. But if Shudras are born from feet of God, how can same Shudra again take birth from hands of God?

c. Soul is timeless and never born. So soul can have no Varna. It is only when it takes birth as human that it has a chance to opt a Varna. Then what is meant by a Varna coming from one part of God’s body? If Soul did not take birth from God’s body, then does it mean body of soul is prepared from God’s body parts? But as per Vedas, even nature is eternal. And same atoms recycle among various humans. So it is technically impossible for any one taking birth from God’s body, even if we assume God to be having a body.
d. The said Purush Sukta is in 31st Chapter of Yajurved, apart from Rigved and Atharvaved with some variations. In Yajurved it is 31.11. To see what it actually means, let us look at the previous mantra 31.10.
It asks a question – Who is mouth? Who is hand? Who is thigh and who is leg?
The next mantra gives the answer – Brahmin is mouth. Kshatriya is hand. Vaishya is thigh and Shudra becomes the legs.
Note that the mantra does not say that Brahmin “takes birth” from mouth…It says Brahmin “is” mouth. Because if the mantra would mean “takes birth” it would not answer the question in previous mantra “Who is mouth?”
For example, if I ask “Who is Dashrath?”, an answer like “Rama is born from Dashrath” would be meaningless!
The actual meaning is:
In society, Brahmins or intellectuals form the brain or head or mouth that think and speak. Kshatriya or defense personnel form the hands that protect. Vaishya or producers and businessmen form the thigh that support and nurture (note that thigh bone or femur produces blood and is strongest bone). In Atharvaveda, instead of Uru or Thigh, the word “Madhya” is used meaning that it denotes also the stomach and central part of body.
Shudra or Labor force form the legs that lay the foundation and make the body run.
The next mantras talk of other parts of this body like mind, eyes etc. The Purush Sukta describes the origin and continuation of creation including human society and states ingredients of a meaningful society.
Thus, its a pity that such a beautiful allegorical description of society and creation is distorted to mean something that is completely contrary to Vedic ethos.
Even the Brahman texts, Manusmriti, Mahabharat, Ramayan and Bhagvat do not state anything even close to crazy hypothesis of God creating Brahmins by tearing of flesh from his mouth, Kshatriya from flesh of hands and so on.

5.It is thus obvious why Brahmins are accorded high respect in Vedas. This is same as what happens even in modern society. Scholars and experts get our respect because they form the direction-providers for entire humanity. However, as we have discussed in previous articles, dignity of labor is equally emphasized in Vedas and hence there is no element of discrimination.

6.In Vedic culture, everyone is considered to be born as Shudra. Then based on his or her education, one becomes a Brahmin, Kshatriya or Vaishya. This completion of education is considered to be a second birth. Hence these three Varnas are called “Dwija” or twice-born. But those who remain uneducated for whatever reasons are not discarded from society. They continue as Shudra and perform support-activities for the society.

7.A son of Brahmin, if he fails to complete his education, becomes a Shudra. Similarly, son of a Shudra or even a Dasyu, if he completes his education can become a Brahmin, Kshatriya or Vaishya. This is pure meritocracy. The way degrees are accorded today, Yajnopaveet was provided in Vedic system. Further, non-compliance with the code of conduct for each Varna could result in taking away of the Yajnopaveet.

8.Many examples exist of change of Varnas in Vedic history.

a. Aitareya Rishi was son of a Daasa or criminal but became a Brahmin of highest order and wrote Aitareya Brahman and Aitareyopanishad. Aitareya Brahman is considered critical to understand Rigveda.

b. Ailush Rishi was son of a Daasi, gambler and of low character. However he researched on Rigveda and made several discoveries. Not only was he invited by Rishis but also made an Acharya. (Aitareya Brahman 2.19)

c. Satyakaam Jaabaal was son of a prostitute but became a Brahmin.

d. Prishadh was son of King Daksha but became a Shudra. Further he did Tapasya to achieve salvation after repenting.
(Vishnu Puran 4.1.14)
Had Tapasya been banned for Shudra as per the fake story from Uttar Ramayan, how could Prishadh do so?

e. Nabhag, soon of King Nedishtha became Vaishya. Many of his sons again became Kshatriya. (Vishnu Puran 4.1.13)

f. Dhrist was son of Nabhag (Vaishya) but became Brahmin and his son became Kshatriya (VP 4.2.2)

g. Further in his generation, some became Brahmin again (VP 9.2.23)

h. As per Bhagvat, Agniveshya became Brahmin though born to a king.

i. Rathotar born in Kshatriya family became a Brahmin as per Vishnu Puran and Bhagvat.

j. Haarit became Brahmin though born to Kshatriya (VP 4.3.5)

k. Shaunak became Brahmin though born in Kshatriya family. (VP 4.8.1). In fact, as per Vayu Puran, Vishnu Puran and Harivansh Puran, sons of Shaunak Rishi belonged to all four Varnas.
Similar examples exist of Gritsamad, Veethavya and Vritsamati.

l. Matanga was son of Chandal but became a Brahmin.

m. Raavan was born from Pulatsya Rishi but became a Rakshas.

n. Pravriddha was son of Raghu King but became a Rakshas.

o. Trishanku was a king but became a Chandal

p. Sons of Vishwamitra became Shudra. Vishwamitra himself was
a Kshatriya who later became a Brahmin.

q. Vidur was son of a servant but became a Brahmin and minister of Hastinapur empire.

9.The word “Shudra” has come in Vedas around 20 times. Nowhere has it been used in a derogatory manner. Nowhere it mentions that Shudras are untouchable, birth-based, disallowed from study of Vedas, lesser in status than other Varnas, disallowed in Yajnas.

10.In Vedas, Shudra means a hard-working person. (Tapase Shudram – Yajurved 30.5). And that is why Purush Sukta calls them as foundation of entire human society.

11.Since the four Varnas refer to 4 kinds of activities by choice, as per Vedas, the same person exhibits characteristics of the 4 varnas in different situations. Thus everyone belongs to all the 4 varnas. However, for simplicity sake, we refer to the predominant profession to be the representative Varna.
And hence, all humans should strive to be all the 4 Varnas to best of their capabilities, as per Vedic wisdom. This is the essence of Purush Sukta.
The Rishis like Vasisth, Vishwamitra, Angira, Gautam, Vaamdeva and Kanva exhibited traits of all the four Varnas. They discovered meanings of Vedic mantras, destroyed Dasyus, did manual labor and indulged in wealth management for social welfare.
We should also emulate the same.

In summary, we see that the Vedic society considers all humans to be one single Jaati or race, upholds the dignity of labor and provides equal opportunity for all humans to adopt the Varna of their choice.
There is no element of birth-based discrimination of any manner in the Vedas.
May we all unite together as one integrated family, reject the last element of birth-based discrimination of any manner and embrace each other as brothers and sisters.
May we also thwart the designs of those who want to mislead us by making baseless claims of casteism in Vedas and destroy the criminals aka Dasyu/Daas/Rakshas.
May we all come under the shelter of Vedas and work together to strengthen the humanity as one single family.

There is no caste-system in Vedas.

 

#saurabhyadavbjp

Kisaan ek abhishap?

देश हमारा भारत है पर चिता जली अरमान की,

टूटी टूटी माला जैसी बिखरी किस्मत आज किसान की !…

इतना सूद चुकाया उसने खुद अपनी सुध भूल गया,

लगा के फांसी सावन में अमवा डाली झूल गया,

आज लगी बोली देखो उसके भी ईमान की….

टूटी माला जैसी बिखरी किस्मत आज किसान की !….

किसी को चिंता काले धन की , किसी को भ्रस्टाचार की,

उसके हिस्से आती लागत बस खरपतवार की,

सरकारी शोषण का हंटर उस पर हरदम चलता है,

गड़गड़ बादल,सूखी धरती में फिर भी वो न थकता है,

मौन मारकर सामंतो को देता शोषित खूब लगान है ,

पगडण्डी तक बनी गवाह जिसके जुल्म निशान की,

टूटी माला जैसी बिखरी किस्मत आज किसान की !….

संसद में नेताओं ने उसको रद्दी मान लिया,

समाचार ने मौका देखा सियासी मुद्दा तान लिया,

जंतर- मंतर का अनशन भी पीएम के लिए मजाक बना,

मंदसौर के दंगे में किसान ही आखिर खाक बना,

बाली तक गिरवी रखी जिसने बेटी के अभिमान की,

चौराहे में मरा वही जिसको लज्जा थी कन्यादान की….

टूटी टूटी माला जैसी बिखरी किस्मत आज किसान की ! 🤔

#saurabhyadavbjp